Monday, May 27, 2024

मुर्गी फार्म प्रशिक्षण



देशी मुर्गी पालन प्रशिक्षण / कुक्कुट पालन प्रशिक्षण 



Kukkut Palan Prashikshan


मुर्गी फार्म कैसे खोलें : दोस्तों आज के समय में जैसा की हम सब जानते है हमारे देश में कई लोग खेती बाड़ी को छोड़कर नए-नए तरीके अपना रहे है अपनी कमाई के। उसी कड़ी में एक मुर्गी फ़ार्म (poultry farming in india) भी शामिल है। और हो भी क्यूँ ना क्योंकि मुर्गी फार्म के काम में मुनाफा ही इतना है की हर कोई इसे करना चाहेगा।


इसलिए हम आपको मुर्गी पालन व्यवसाय (poultry farm business plan) के बारें में सब कुछ बताएँगे की कैसे आप अपना फार्म बना सकते है और कैसे देसी मुर्गी पोल्ट्री फार्म से बड़ा मुनाफा कमा सकते है।


मुर्गी फार्म प्रशिक्षण :





सबसे जरूरी बात है प्रशिक्षण अगर आप प्रशिक्षण (poultry farm Training Center) लिए बिना कोई भी कार्य करते है तो आपको घाटे से सामना करना पड़ता है, इसलिए हमारे देश में कई ऐसी संस्थान है जहाँ मुर्गी पालन (poultry farming project) का प्रशिक्षण दिया जाता है।



इसके लिए कार्यालय में युवा आवेदन कर सकते हैं। और इसके लिए निर्धारित आयु 18 से 70 वर्ष है। तथा आठवीं उत्तीर्ण जरूरी है। आवेदक को 5 पासपोर्ट फोटो, परिचय पत्र व अन्य कागजात लेकर जाएं।


मुर्गीघर बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें :




यहाँ हम आपको निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा मुर्गीघर बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातों (poultry farm equipment) से अवगत करा रहे है, जो इस प्रकार है...



मुर्गीघर अपने आवास के साथ लगा हुआ एवं स्थानीय सामग्रियों से बनाया जा सकता है। जहाँ तक हो सके, घर को पूर्व-पश्चिम दिशा की ओर बनाएं।

यदि संभव तो मुर्गीघर को इक्कट्ठे हुए पानी, बाढ़ आदि से बचाने हेतु घर के फर्श को जमीन से करीब 1 फुट ऊँचा बनाएं ताकि बीट आदि नीचे इकट्ठा हो जाए जिसे बाद में खाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

मुर्गीघर बहतु महंगा नहीं होना चाहिए, परन्तु घर की मजबूती, आराम तथा सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

घर का फर्श ऐसा होना चाहिए कि नमी तथा दरार पड़ने से बचा रहे, आसानी से साफ किया जा सके, मजबूत हो तथा चूहों इत्यादि का प्रवेश न होने पाए।

मुर्गी घर में आस-पास पेड़ लगाएं ताकि पेड़ों की छाया उस पर पड़ती रहे।

दीवारों का लगभग 75% हिस्से को बांस की जाली बनाकर ढकें। जालीदार दीवार में मोटा बोरा का पर्दा लगाएं जिसे सामान्यतः गोल घुमाकर ऊपर बांध कर रखें। आवश्यकतानुसार बारिश या तेज धुप पड़ने पर उसे खोल कर नीचे लटका दें ताकि मुर्गियाँ पानी तह गर्मी से बची रहें। इन बोरोन को अधिक गर्मी के दिनों में पानी डालकर ठंडा रखें।


जब आप ऊपर बताए गए बिन्दुनुसार अपना मुर्गी फ़ार्म तैयार कर लेते है तो आपको जरूरत पड़ती है फिर आधुनिक उपकरणों की तो इनमे फीडर गर्मी प्रदान करने के लिए लाइट बल्ब तथा हलोजन्स लाइट , दवाई , टीकाकरण की सामग्री इत्यादि शामिल होते है।



ध्यान रहे की मुर्गी पालन व्यवसाय तीन चीज़ों के लिए किया जाता है...




1. मांस के लिए



2. अंडा के लिए



3. अंडा मांस दोनों के लिए

4. कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाना हमारा उद्देश्य है तथा इसके लिए हमें चाहिए के हम सही देसी नस्लों के मुर्गी का चयन करें। अपने जगह के वातावरण के अनुसार ही मुर्गी का नसल का चुनाव करें आजकल बाजार में संकर नस्ल के मुर्गियां भी उपलब्ध हैं जो के अंडा और मांस के लिए काफी लाभदायक हैं।


जून महा कि प्रशिक्षण सुरू होने वाला है आप आवेदन कर सकते है इसमें केवल अस्सी 80 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण ले सकते है l

नीचे दिये गये ऍड्रेस पे आप डॉक्युमेंट्स भेज सकते है..


विश्व मराठा यशोज्ञान फाउंडेशन, 

झेन स्टार फार्मा..

 सिल्वर बिल्डकॉन शॉप नंबर 18, मेहर हॉटेल के नीचे मेहर सिग्नल के पास गोळे कॉलनी नाशिक महाराष्ट्र 


OFFICE CONTACT -7798400021

NAVNATH THAKARE 9881854006


https://chat.whatsapp.com/J7nPCQLra7sCAJdEuppYJB


Click on the link for join group of kukut palan shibir।

कृपया ऊपर दिए गए लिंकको क्लिक करें और ग्रुप में ज्वॉइन करें

सदर लिंक वरती क्लिक करून ग्रुप मध्ये ऍड होऊ शकता...

जरासंध महाभारत कालीन मगध

 जरासंध महाभारत कालीन मगध राज्य के नरेश थे । सम्राट जरासंध ने बहुत से राजाओं को अपने कारागार में बंदी बनाकर रखा था पर उसने किसी को भी मारा नहीं था। इसका कारण यह था कि वह चक्रवर्ती सम्राट बनने की लालसा हेतु ही वह इन राजाओं को बंदी बनाकर रख रहा था ताकि जिस दिन 101 राजा हों और वे महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी बलि दे सके।



बलभद्र और जरासंध के बीच युद्ध

वह मथुरा के नरेश कंस का ससुर एवं परम मित्र था उसकी दोनो पुत्रियो अस्ति और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था। श्रीकृष्ण से कंस के वध का प्रतिशोध लेने के लिए उन्होंने १७ बार मथुरा पर चढ़ाई की लेकिन जिसके कारण भगवान श्रीकृष्ण को मथुरा छोड़ कर जाना पड़ा फिर वो द्वारिका जा बसे, तभी उनका नाम रणछोड़ कहलाया।


जन्म

संपादित करें

माना जाता है कि जरासंध के पिता मगध नरेश बृहद्रथ थे और उनकी दो पटरानियां थी। वह दोनो ही को एक संतान चाहते थे। बहुत समय व्यतीत हो गया और वे बूढ़े़ हो चले थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। तब एक बार उन्होंने सुना की उनके राज्य में ऋषि चंडकौशिक पधारे हुए हैं और वे एक आम के वृक्ष के नीचे विराजमान हैं। यह सुनते ही राजन आशापूर्ण होकर ऋषि से मिलने चल दिए। ऋषि के पास पहुँच कर उन्होंने ऋषि को अपना दुख कह सुनाया। राजा का वृतांत सुनकर ऋषि को दया आ गई और उन्होंने नरेश को एक आम दिया और कहा की इसे अपनी रानी को खिला देना। लेकिन चूंकि उनकी दो पत्नीयां थी और वे दोनो ही से एक समान प्रेम करते थे, इसलिए उन्होंने उस आम के बराबर टुकड़े करके अपनी दोनो रानियों को खिला दिया। इससे दोनो रानियों को आधे-आधे पुत्र हुए। भय के मारे उन्होंने उन दोनो टुकड़ो को वन में फिकवा दिया। तभी वहाँ से जरा नामक राक्षसी गुज़र रही थी। उसने ने माँस के उन दोनों लोथड़ों को देखा और उसने दायां लोथड़ा दाएं हाथ में और बायां लोथड़ा बाएं हाथ में लिया जिससे वह दोनो टुकडे जुड़ गए। और फिर जरा नामक राक्षसी ने उसे राजा बृहद्रथ को सौप दिया और राजभवन में दोनों रानियों की छाती से दुध उतर आया। इसीलिए उसका नाम जरासंध हुआ। सम्राट जरासंध महादेव का बहुत बड़ा भक्त था ।उनकी बहन का नाम शशिरेखा था जो कि धृष्टद्युम्न से प्रेम करती थी परंतु उसके भाई जरासंध ने उसकी शादी कौरव से लगाने का प्रयत्न किया। सभी कौरव शशिरेखा से प्रमुख करते थे पर शशिरेखा ने जिद्द से धृष्टद्युम्न से विवाह की।



अंग प्रदेश का राजा बनने के पश्चात , कर्ण अंग की प्रजा को मगध नरेश के अन्याय से मुक्त करने के लिए जरासंध से युद्ध करता है । यह युद्ध लागातार 500 दिनों तक चला था। इसी युद्व के अन्तिम मे कर्ण जरासंध को बताता है कि उसे उसकी कमजोरी का ज्ञान है। उसे बीच से फाड़कर मारा जा सकता है। तब जरासंध अपनी पराजय स्वीकार कर लेता हैं और यही से उसकी म्रत्यु का रहस्य सबके सामने आ जाता है।


इंद्रप्रस्थ नगरी का निर्माण पूरा होने के पश्चात एक दिन नारद मुनि ने महाराज युधिष्ठिर को उनके पिता का यह संदेश सुनाया की अब वे राजसूय यज्ञ करें। इस विषय पर महाराज ने श्रीकृष्ण से बात की तो उन्होंने भी युधिष्ठिर को राजसूय यज्ञ करने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन महाराज युधिष्ठिर के चक्रवर्ती सम्राट बनने के मार्ग में केवल एक रोड़ा था, मगध नरेश जरासंध, जिसे परास्त किए बिना वह सम्राट नहीं बन सकते थे और ना ही उसे रणभूमि मे परास्त किया जा सकता था। इस समस्या का समाधान करने के लिए श्रीकृष्ण, भीमसेन और अर्जुन के साथ ब्राह्मणों का भेष बनाकर मगध की ओर चल दिए। वहाँ पहुँच कर जरासंध ने उन्हें ब्राह्मण समझकर कुछ माँग लेने के लिए कहा लेकिन उस समय ब्राह्मण भेषधारी श्रीकृष्ण ने कहा की अभी उनके दोनो मित्रों का मौन व्रत है जो अर्ध रात्रि में समाप्त होगा। तब जरासंध ने अर्ध रात्रि तब ही आने का वचन दिया और उन्हें ब्राह्मण कक्ष मे ठहराया।


तब अर्धरात्रि में वह आया लेकिन उसे उन तीनों पर कुछ संदेह हुआ की वे ब्राह्मण नहीं है क्योंकि वे शरीर से क्षत्रिय जैसे लग रहे थे उसने अपने संदेह को प्रकट किया और उन्हे उनके वास्तविक रूप में आने को कहा एवं उन्हे पहचान लिया। तब श्रीकृष्ण की खरी-खोटी सुनने के बाद उसे क्रोध आ गया और उसने कहा की उन्हें जो भी चाहिए वे माँग ले और यहाँ से चले जाएं। तब उन्होंने ब्राह्मण भेष में ही जरासंध को मल्लयुद्ध करने के लिए कहा और फिर अपना वास्तविक परिचय दिया। जरासन्ध एक वीर योधा था इसलिए उसने मल्ल युद्ध के लिए भीम को ही चुना। किंतु अर्जुन भी एक शक्तिशाली और योग्य योद्धा था नकुल भी जरासंध को हरा सकता था। तब अगले दिन उसने भीम के साथ मल्लभूमि में मल्ल युद्ध किया। यह युद्ध लगभग २८ दिनो तक चलता रहा लेकिन जितनी बार भीमसेन उसके दो टुकड़े करते वह फिर से जुड़ जाता। इस पर श्रीकृष्ण ने घास की एक डंडी की सहायता से भीम को संकेत किया की इस बार वह उसके टुकड़े कर के दोनों टुकड़े अलग-अलग दिशा में फेंके। तब भीम ने वैसा ही किया और इस प्रकार जरासंध का वध हुआ।


तब उसका वध करके उन तीनों ने उसके बंदीगृह में बंद सभी ८६ राजाओं को मुक्त किया और श्रीकृष्ण ने जरासंध के पुत्र सहदेव को राजा बनाया। सहदेव ने आगे चलकर के महाभारत के युध मे पान्डवो का साथ दिया।

Monday, May 20, 2024

प्रशिक्षण शिबीर

 प्रशिक्षणाचे विषय 

विश्व मराठा यशोज्ञान फाउंडेशन आयोजित विविध शिक्षण खालील प्रमाणे..

ज्या क्षेत्रातील प्रशिक्षण घेण्याची इच्छा आपणास असेल तर आपण नक्की संपर्क करू 

9881854006



1) कुकुट पालन प्रशिक्षण 

2)मधुमक्षिका पालन प्रशिक्षण 

3)ब्युटी पार्लर प्रशिक्षण 

4)महिला शिवणकाम प्रशिक्षण

5)शेळी पालन प्रशिक्षण

6)गांडूळ खत निर्मिती दुग्ध 7)व्यवसाय प्रशिक्षण 

8)रेशीम कोष उत्पादक प्रशिक्षण

9)प्लंबिंग व सॅनिटरी वर्क प्रशिक्षण

10)सर्वसाधारण उद्योजकता विकास प्रशिक्षण 

11)पापड लोणचे मसाले उद्योग प्रशिक्षण 

12)घरगुती वायरिंग प्रशिक्षण 

13)दुग्ध व्यवसाय व गांडूळ खत निर्मिती प्रशिक्षण 

14)मोबाईल रिपेरिंग व्यवसाय प्रशिक्षण 

15)फोटोग्राफी व व्हिडिओग्राफी प्रशिक्षण 

16)मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण 

17)मेन्स पार्लर व सलून उद्योग प्रशिक्षण 

18)पेपर कव्हर पाकीट फाईल बनवणे प्रशिक्षण 

19)घरेलू उपकरण दुरुस्ती प्रशिक्षण 

20)शेडनेट पॉलिहाऊस मधील शेती प्रशिक्षण 

21)दुचाकी दुरुस्ती प्रशिक्षण 

22)फोटो फ्रेम व लॅमिनेशन प्रशिक्षण 

23)बांबू क्राफ्ट व शोभेच्या वस्तू तयार करणे प्रशिक्षण 

24)सीसीटीव्ही इन्स्टॉलेशन व सर्विसेस प्रशिक्षण 

25)फ्रिज एसी कॉन्फरिंग सर्विसेस प्रशिक्षण 

26)इलेक्ट्रॉनिक मोटर रिवायडींग रिपेरिंग व सर्व प्रशिक्षण

Saturday, April 27, 2024

मतदान न करण्याची शिक्षा सियालकोट

 मतदान न करण्याची शिक्षा

           सियालकोट

*लम्होने खता की थी, सदियों ने सजा पाई l*

 नुकतेच पहिल्या टप्प्यातील मतदान पार पडले आहे आणि आता लगेच दुसऱ्या टप्प्याचे मतदान समोर उभे आहे. नंतर आणखी पाच टप्पे आहेत. पहिल्या टप्प्यात कमी मतदान झाले म्हणून इतिहासातील एका घटनेची आठवण करून द्यावीशी वाटते. मतदान केले नाही तर त्याची शिक्षा किती पिढ्यांनी भोगली आणि देशाने त्याची किती मोठी किंमत मोजली हे या घटनेवरून लक्षात येईल. 

ही घटना आहे १९४६ मधील, म्हणजे स्वातंत्र्यपूर्व फाळणीच्या अगोदरची. सियालकोट, पाकिस्तान मधील पंजाब प्रांतचा एक जिल्हा. लाहोर पासून याचे अंतर १३५ किलोमीटर आहे आणि जम्मू पासून फक्त ४२ किलोमीटर. गोपीनाथ बारडोलोई हे आसाम मधील आणि देशाचे मोठे नेते होते. सियालकोट हे फाळणीच्या वेळी भारतामध्ये राहावे यासाठी ते प्रयत्नशील होते. सियालकोट हा त्यावेळी हिंदू बहुल प्रदेश होता. तरीही असे ठरले की जनमत संग्रह घेऊन निकालाच्या आधारावर सियालकोट भारतात राहील का पाकिस्तानात जाईल हे ठरवायचे होते. जनमत संग्रहाची तारीख, वेळ आणि प्रक्रिया सर्व ठरले. मतदानाचा दिवस उजाडला. सकाळपासून मतदान सुरू झाले. मुसलमान सर्वात आधी सकाळी लवकर उठून मतदानासाठी रांगा लावून मतदान करू लागले. मोठ्या रांगा लागल्या. हिंदू निवांत उठले. जेवण वगैरे करून दुपारी मतदानासाठी आले. बघतात तर समोर मोठ्या रांगा लागल्या होत्या. काही हिंदू रांगा बघूनच मतदान न करता घरी निघून गेले. काही हिंदू रांगेत उभे राहून कंटाळून घरी परत निघून गेले. 

मतदानाचा निकाल आला. आणि ५५,००० मतांनी सियालकोट पाकिस्तानात सामील होण्याचा प्रस्ताव पास झाला. कारण एक लाख हिंदूंनी मतदान केले नाही. १९४१ च्या जनगणनेनुसार सियालकोटची एकूण हिंदू संख्या दोन लाख एकतीस हजार होती. पैकी एक लाख हिंदूंनी मतदान केले नाही. मुसलमान संख्येने कमी असूनही सर्वांनी मतदान केल्यामुळे सियालकोट पाकिस्तानात सामील करायचे ठरले गेले .

यानंतर १६ ऑगस्ट १९४६ चा काळा दिवस उजाडला. जिन्नांनी "डायरेक्ट ॲक्शनची" घोषणा केली. त्याचा प्रहार सियालकोट वर पण झाला. मोठ्या प्रमाणावर हिंदू स्त्रियांची अब्रू लुटून हत्या करण्यात आली आणि हिंदू मुले आणि पुरुषांची कत्तल करण्यात आली. मतदानाच्या दिवशी जे आराम करून घरी विश्रांती घेत राहिले ते कायमच्या विश्रांतीसाठी देवाघरी पाठविले गेले.

त्यानंतर १९५१ च्या जनगणनेनुसार सियालकोटची हिंदू संख्या केवळ दहा हजार राहिली. सन २०१७ मधे ही संख्या आता फक्त पाचशे एवढी राहिली आहे. आज सियालकोट मधे एक तरी हिंदू राहिला असेल असे वाटत नाही. १९४६ ला जर हिंदूंनी मतदान केले असते तर सियालकोट भारतात राहिला असता आणि सर्व हिंदू पिढ्या दिमाखात राहिल्या असत्या. आपले एक मत न देण्याने काय होते याचे इतिहासातील सर्वात मोठे उदाहरण म्हणजे सियालकोट. हिंदू, त्यातल्या त्यात शहरी हिंदू, हा राष्ट्रीय निष्ठेला कमी जागरूक आहे. शहरी हिंदू मतदानाच्या दिवशी सुट्टी समजून मजेत दिवस घालवतो आणि मतदान न करता सर्व कामे सरकारने करावीत ही अपेक्षा ठेवतो. या उलट ग्रामीण लोकसंख्येने अशिक्षित असून सुद्धा मतदान करून लोकशाही अजून जिवंत ठेवली आहे. अजूनही जर प्रत्येक हिंदू मतदाता जागरूक होणार नसेल तर भारताचे सियालकोट होण्याला उशीर लागणार नाही. आणि इथून पुढील हिंदू पिढींना त्याची फार मोठी किंमत चुकवावी लागेल हे इतिहास आणि सियालकोटच्या घटनेने दाखवून दिले आहे.

*जागे व्हा आणि मतदान अवश्य करा*



Tuesday, April 23, 2024

Gold Silver Rates Today

 Gold Silver Rates Today 

 सोने आणि चांदी खरेदी करणाऱ्यांसाठी एक आनंदाची बातमी आहे. आज २३ एप्रिल रोजी दोन्हीच्या किमतीत मोठी घसरण झाली.

Gold Silver Rates Today : सोने आणि चांदी खरेदी करणाऱ्यांसाठी एक आनंदाची बातमी आहे. आज २३ एप्रिल रोजी दोन्हीच्या किमतीत मोठी घसरण झाली. भारतीय आणि जागतिक बाजारात सोन्या-चांदीच्या दरात घसरण दिसून आली. सोन्याचा भाव विक्रमी उच्चांकावरून ४५०० रुपयांपर्यंत घसरला आहे. तर चांदीचा भावही ७००० रुपयांपर्यंत घसरला.



स्वस्त झाले दर 


आज देशांतर्गत वायदा बाजारात सोन्या-चांदीचे भाव ७००-८०० रुपयांनी घसरून उघडले. एमसीएक्सवर, सोनं ६५७ रुपयांनी घसरलं आणि ७०५४० रुपये प्रति १० ग्रॅमच्या जवळ व्यवहार करत होतं. चांदीचा भावही सुमारे ७०० रुपयांनी घसरून ७९८५८ रुपये प्रतिकिलो झाला आहे. सोनं विक्रमी पातळीपासून सुमारे साडेचार हजार रुपयांनी घसरलंय. याच महिन्यात सोन्यानं ७३,९५८ रुपयांचा आजवरचा उच्चांकी स्तर गाठला होता. त्याचप्रमाणे चांदीचा भावही ८६,१२६ रुपये प्रति किलो या विक्रमी पातळीवरून ७००० रुपयांवर घसरला आहे.  

उन्हात बांधलेले प्राणी बोलू शकत नाहीत...

 


उन्हात बांधलेले प्राणी बोलू शकत नाहीत, 

*ना ते आंदोलन करू शकतात,* 

*ना त्यांच्या हक्कासाठी उच्च न्यायालयात जाऊ शकतात..*.. वर्तमानपत्रात किंवा दूरचित्रवाणीतही त्यांच्यासाठी जागा नाही... ते *फक्त कडक उन्हात आपली त्वचा जाळू शकतात.* कडाक्याच्या उन्हात रस्त्यावर कुठेही जनावरे बांधलेली दिसली तर त्यांना *सावलीत बांधून ठेवण्याची विनंती करावी.* आपण शेतकऱ्यांची पोर आहोत त्यामुळे एवढे तर निश्चित करू शकतात त्यामुळे अनेक मेसेज आपण व्हायरल करत असतो तर शेतकऱ्यांच्या अंतर्मनातील जीभ 

 प्राणी मात्र दया आहे त्यासाठी आपल्या एसी गाडी मधून जात असताना रस्त्याने उन्हात बांधलेली जनावर बैल गाय घोडा बकरी कुठे दिसली तर त्यासाठी आपल्याला जर त्यांना व्यवस्थित ठिकाणी व्यवस्था करण्याची विनंती करण्याची गरज आहे तेवढे दहा मिनिटे वीस मिनिटे आपले वाया जाऊ शकतात पलीकडे काही नाही करून पहा छोटासा प्रयोग आहे परंतु त्या मागील आशीर्वाद अनंत असतील सहज सुचलं म्हणून आपल्याला पाठवलं आपण पुढे पाठवला पाहिजे असा आग्रह नाही जमलं तर प्रयत्न करा एवढीच विनंती आपला


Monday, April 22, 2024

TODAY'S Gold Rate

 TODAY'S Gold Rate In India: आज अचानक


 सस्ता हो गया गोल्ड और सिल्वर.  


Gold AND SILVER Price Today in India: हाल ही में देश और विदेश में सोने की कीमत बहुत तेजी से बढ़ी. लोगों के लिए 10 ग्राम सोना खरीदना भी बहुत महंगा हो गया. लेकिन क्या आपको पता है कि 22 अप्रैल को गोल्ड और सिल्वर सस्ता हो गया जानिए हर एक डिटेल.




कल 22 अप्रैल को सोने (Gold Price Today in India) और चांदी में सुस्ती आई और इसकी चमक कुछ कम हो गई. MCX पर जून डिलीवरी वाला सोना (Gold Rate) 73000 रुपए के नीचे है. कीमत 1.04 फीसदी गिरकर 72050 रुपए प्रति 10 ग्राम पर है. चांदी (Silver Price) 1.74 फीसदी नीचे 82050 रुपए प्रति किलो हो गई.



आपको बता दें कि गोल्ड में 2400 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर मुनाफा वसूली हुई, जिसकी वजह से सोना सस्ता हुआ. आगे पढ़िए और किन वजहों से सोना सस्ता हु


आ है.

Saturday, April 20, 2024

भेड बकरी ओ के लिये सरकार दे रही है 50 % सबसिडी

भेड बकरीओ के लिये सरकार दे रही है 50 % सबसिडी 

1)भेड़ और बकरी दोनों ही जानवर होते हैं जो पशुपालन के लिए प्रसिद्ध हैं। ये दोनों उपजाऊ जानवर हैं और लोगों के लिए उपयोगी भी हैं। इनका पालन दूध और मांस के लिए किया जाता है, साथ ही इनकी चमड़ा भी काम आती है। यहां भेड़ और बकरी की जातियों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।


2)भेड़ की जातियाँ:


बकरी (Capra aegagrus hircus):

बकरी एक छोटी उपजाऊ पशु है जो मांस, दूध, और चमड़े के लिए पालने जाते हैं।

बकरी की चार सिरदर्द और सींग बहुत ही प्रसिद्ध हैं।

ये गर्मियों में पालतू बकरियों के रूप में भी पाए जाते हैं।

इनकी आकार और रंग विभिन्न होती है।

3)बारबरी:

यह बकरी की प्रमुख जातियों में से एक है।

बारबरी उत्तरी भारत में पाई जाती है और उत्तर भारतीय किसानों के लिए लाभदायक है।

इसकी विशेषता उत्कृष्ट दूध उत्पादन है।

4)जमुनपारी:

जमुनपारी भारतीय बकरी की मशहूर जातियों में से एक है।

इसका नाम उत्तर प्रदेश के जमुना नदी के नाम पर है।

यह दूध के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है और इसका चमड़ा भी अच्छा होता है।

5)सीरी:

सीरी बकरी की एक अन्य महत्वपूर्ण जाति है।

यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पाई जाती है।

इसकी खासियत उत्कृष्ट मांस उत्पादन है।

6)सोजती:

सोजती बकरी राजस्थान की प्रमुख जातियों में से एक है।

इसका विशेषता अपने चिकने दूध का उत्पादन है।

सोजती बकरी ज्यादातर मरुस्थल क्षेत्रों में पाई जाती है।

7)बकरी की जातियाँ:


बकरी (Capra aegagrus hircus):

बकरी भेड़ की तरह ही होती है और इसका पालन दूध, मांस, और चमड़े के लिए किया जाता है।

बकरी के बाल और चार छोटे सिरदर्द उसकी पहचान होती है।

8)बोरा:

बोरा बकरी की एक लोकप्रिय जाति है जो गोट के लिए उपयुक्त होती है।

इसकी विशेषता उसके लंबे बालों में होती है जो इसे अलग बनाते हैं।

सबसिडी दे रही है सरकार जाने के लिए फाउंडेशन से कॉन्टॅक्ट कर सकते है|


राम मंदिर, अयोध्या की जानकारी


 *राम मंदिर, अयोध्या की जानकारी*


*स्थान:* राम मंदिर, अयोध्या, उत्तर प्रदेश, भारत।

इतिहास: राम मंदिर अयोध्या की प्राचीनतम और महत्वपूर्ण निर्मितियों में से एक है। इसका इतिहास अत्यंत प्राचीन है। अनुमान है कि यह मंदिर लगभग 10वीं सदी ईसा पूर्व में बना था। यहां पर भगवान राम का भव्य मंदिर स्थानित है, जिसे मुघलसाम्राज्य के समय में तोड़कर बाबर ने बाबरी मस्जिद बनाई थी।

*अयोध्या विवाद:* 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद की तोड़फोड़ के बाद, राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के स्थान पर जमीनी विवाद शुरू हुआ।

*राम मंदिर निर्माण:* 2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद के मामले में निर्णय दिया, जिसमें राम भगवान के भव्य मंदिर का निर्माण करने के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया। इसके बाद, भव्य राम मंदिर का निर्माण आरंभ हुआ।

राम मंदिर का निर्माण: राम मंदिर का निर्माण एक भव्य और आध्यात्मिक परियोजना है, जिसे विभिन्न भागों में विभाजित किया गया है। इस परियोजना का मुख्य स्थापना समारोह 5 अगस्त 2020 को भव्यता से मनाया गया था। अब मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

*मंदिर की डिज़ाइन:* मंदिर का डिज़ाइन अत्यंत आकर्षक और भव्य है। यह समृद्ध भारतीय संस्कृति के अनुरूप है, जिसमें भगवान राम के जीवन के कई पहलुओं को दर्शाया गया है।

*प्राण-प्रतिष्ठा:* मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा 2022 में होने की उम्मीद है, जिसमें बड़े संतों, धार्मिक आध्यात्मिक गुरुओं और राजनेताओं की उपस्थिति होगी।

राम मंदिर अयोध्या का निर्माण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, जो राष्ट्रीय एकता, धर्मनिरपेक्षता, और समरसता के प्रतीक के रूप में माना जाता है।

Sunday, April 14, 2024

बाबासाहेब आंबेडकर लिखित इंडियन पार्टिशन ऑफ इंडिया पुस्तकाचे विश्लेषण

 बाबासाहेब आंबेडकर लिखित इंडियन पार्टिशन ऑफ इंडिया पुस्तकाचे विश्लेषण


ChatGPT




बाबासाहेब आंबेडकर यांची "इंडियन पार्टिशन ऑफ इंडिया" ही पुस्तक भारताच्या इतिहासाच्या महत्वाच्या प्रकारावर चिंतनात्मक आणि सामाजिक अभ्यासाच्या बाबतीत अत्यंत महत्त्वपूर्ण आहे. ही पुस्तक आंबेडकर यांच्या विचारांची व्याख्या आणि त्यांचे सामाजिक विचारांचे विस्तृत अभ्यास आहे, ज्यामुळे हे एक सामाजिक आणि राजकीय परिणामकारी प्रक्रिया कसे होते आणि कशी होते, हे समजायला मदत करते.

पुस्तकात आंबेडकर यांनी भारताच्या पार्टिशनच्या प्रक्रियेचा इतिहास विश्लेषण केला आहे. त्यांनी भारतीय विभाजनाच्या प्रमुख कारकांचे विश्लेषण केले, जसे की धर्म, सामाजिक आणि राजकीय भेद, आर्थिक असमानता, आणि विभाजनाच्या प्रमुख कारणांमध्ये आंबेडकर यांच्या नजरेतून दर्शविले.

आंबेडकर यांनी पुस्तकात भारतीय समाजातील विभाजनाच्या सामाजिक व राजकीय पहिले अगदी मोठ्या प्रमाणावर स्पष्टीकरण केले. त्यांनी विभाजनाच्या प्रक्रियेचा आपल्या स्वतंत्रतेच्या मार्गावर दाखला केला आणि भारतीय समाजातील संघर्षाच्या आणि असमानतेच्या प्रक्रियेचा मोठ्या प्रमाणावर प्रभाव कसा झाला, हे समजायला दर्शविले.

पुस्तकाच्या माध्यमातून, आंबेडकर यांनी भारताच्या इतिहासातील हे महत्वाचे प्रश्न तळमळलेल्या प्रकाराने तयार केले की विभाजन कसा होता, कोणत्या कारणांमुळे होता, आणि त्याचे परिणाम काय होते, हे विचारकांना चर्चा करण्यात मदत करते.

पुस्तकाच्या उत्तराधिकारी नेहमीच्या वाचकांना आंबेडकर यांच्या दृष्टिकोनातून विभाजनाचे इतिहास आणि त्याचे प्रभावांचे विश्लेषण मिळेल.


पशुपालनाची जोड शेतीला

 पशुपालनाची जोड शेतीला


शेती करताना विविध प्रकारचे पशुपालन व्यवसाय केले जातात, ज्यामुळे व्यक्ती अधिक आयाची साधने करू शकतात. खासगी, शेती करताना जोडधंदा खरीप व रबी कापूस जास्त खाणी पोहचविण्याच्या वेळेस व प्रका


रानुसार अन्नद्रव्ये उत्पादन करण्यात मदत करू शकतात.


पालन: पशुपालन व्यवसाय हे एक अत्यंत महत्त्वाचे व्यवसाय आहे. गाय, म्हशी, कुकुट, मेंढी यांची पालन शेतीवरील वातावरणाशी जुळून चालवली जाते. त्यामुळे शेतीतील संपूर्णता व लाभक्षमता वाढते.


गाय म्हशी पालन: गाय व म्हशी पालन शेतीकडून अद्याप लोकप्रिय आहे. गायांचं दूध, म्हश्यांचं मांस व दूध हे खाद्य पदार्थ आहेत, ज्यामुळे ह्या पालनाचा बाजार अत्यंत आणखी मोठा आहे.



कुकुट पालन: डिफॉल्ट फेड, मुर्गी पालनाचं प्रायोगिक आणि आर्थिक व्यवसाय आहे. त्यामुळे डागिंग नियंत्रण, डॉक्टर लाईन, पालन सामग्री, पोल्ट्री फार्मिंग संचालन, उत्पादन, वितरण आणि विपणन ह्याच्या व्यवस्थापनामार्फत केल्या जातात.



मेंढी पालन: मेंढी पालन हा आजच्या काळात सर्वात लोकप्रिय व्यवसाय आहे. मेंढीचे मांस आणि त्याचं तेल हे खाद्य उत्पादनासाठी खूप मोठं माग आहे.



जर शेतीकडून उत्पादन कितीही वाढत असेल, तर पशुपालनाचा व्यवसाय त्याला संपूर्णत्वातून मदत करू शकतो. त्यात तंत्रज्ञान, व्यवसाय नियोजन, उत्पादन प्रबंधन, विपणन आणि बाजारीकरण हे सर्व गंभीरपणे गमावलेल्या घटक आहेत.







संधिवाताचे प्रकार व उपाय

 

संधिवात म्हणजे काय

संधिवात एक प्रकारचे आर्थराइटिस आहे ज्यामुळे कोणत्याही उपायाने त्याचा पूर्णपणे नियंत्रण केला जाऊ शकत नाही. परंतु, विविध उपायांच्या संयुक्त प्रयत्नांनी संधिवाताच्या लक्षणांचे कमी केले जाऊ शकते. ये त्यांच्यामध्ये सहाय्य करू शकतात:

  1. औषध: डॉक्टरच्या सल्ल्यानुसार औषध घेणे संधिवाताच्या लक्षणांचे कमी करण्यात मदत करू शकते. डॉक्टरांच्या सल्ल्यानुसार आम्ही डायनाक्स, अयूर्वेदिक औषध, क्षारसारख्या औषधांचा वापर करू शकतो.

  2. व्यायाम: नियमित व्यायाम करणे संधिवाताच्या दर्दाचे कमी करण्यात मदत करू शकते. स्थिरता व अस्थिरता व्यायाम जसे की योगा, प्राणायाम, स्थिरता अभ्यास, उपवास इत्यादी केल्यास लाभ होईल.

  3. आहार: संधिवाताच्या रुग्णाला नियमित आहार घेऊन जीवनशैली बदलणे आवश्यक आहे. त्यांच्यामध्ये खाण्यात शुद्ध आहार, ताजे फळे आणि सब्ज्यांचा वापर करावा. ज्यामुळे त्यांच्या शरीराला अधिक पोषक तत्त्वे मिळतील व आणि वजन कमी होईल.

  4. ध्यान: मानसिक स्थिती मोठ्या प्रमाणात संधिवाताच्या लक्षणांवर परिणामी असू शकते. ध्यान, मेधावी तंत्र अभ्यास, प्राणायाम, आणि मनपरिपाक करण्यात मदत करू शकते.

  5. थर्मल उपचार: उष्णता किंवा थंडीने संधिवाताच्या लक्षणांवर परिणामीपणे परिणामी असू शकतात. हाट या ठंडे पैक्स अथवा थर्मल पैक्सचा वापर करणे दर्दाचे समाधान करू शकते.

तुमच्या डॉक्टरांशी बोलण्याची गरज आहे आणि त्यांचे सल्ल्यानुसार उपचार करणे महत्वाचे आहे. संधिवात हे आजार असून त्याचे उपाय तुमच्या डॉक्टरांशी चर्चा केल्यानंतरच ठेवणे आवश्यक आहे.

top 5 kings of india


top 5 kings of india


Listing the "top" kings of India is subjective, as different rulers had significant impacts on different regions and eras. However, some widely recognized kings include:


  1. 1)Ashoka the Great (304–232 BCE): Known for his conversion to Buddhism and his role in spreading the religion across ancient India.

  2. 2) Chandragupta Maurya (340–298 BCE): Founder of the Maurya Empire and the first emperor to unify most of the Indian subcontinent.
  3. 3) Akbar the Great (1542–1605): Known for his administrative reforms, cultural integration policies, and military conquests, which expanded the Mughal Empire to its greatest extent.
  4. 4) Chhatrapati Shivaji Maharaj (1630–1680): Founder of the Maratha Empire and known for his guerrilla warfare tactics against the Mughal Empire.
  5. 5)Raja Raja Chola I (947–1014 CE): Known for his contributions to Tamil literature and the expansion of the Chola dynasty's territory in South India and Southeast Asia.

These are just a few examples, and there are many other significant rulers throughout Indian history.