Monday, May 27, 2024

मुर्गी फार्म प्रशिक्षण



देशी मुर्गी पालन प्रशिक्षण / कुक्कुट पालन प्रशिक्षण 



Kukkut Palan Prashikshan


मुर्गी फार्म कैसे खोलें : दोस्तों आज के समय में जैसा की हम सब जानते है हमारे देश में कई लोग खेती बाड़ी को छोड़कर नए-नए तरीके अपना रहे है अपनी कमाई के। उसी कड़ी में एक मुर्गी फ़ार्म (poultry farming in india) भी शामिल है। और हो भी क्यूँ ना क्योंकि मुर्गी फार्म के काम में मुनाफा ही इतना है की हर कोई इसे करना चाहेगा।


इसलिए हम आपको मुर्गी पालन व्यवसाय (poultry farm business plan) के बारें में सब कुछ बताएँगे की कैसे आप अपना फार्म बना सकते है और कैसे देसी मुर्गी पोल्ट्री फार्म से बड़ा मुनाफा कमा सकते है।


मुर्गी फार्म प्रशिक्षण :





सबसे जरूरी बात है प्रशिक्षण अगर आप प्रशिक्षण (poultry farm Training Center) लिए बिना कोई भी कार्य करते है तो आपको घाटे से सामना करना पड़ता है, इसलिए हमारे देश में कई ऐसी संस्थान है जहाँ मुर्गी पालन (poultry farming project) का प्रशिक्षण दिया जाता है।



इसके लिए कार्यालय में युवा आवेदन कर सकते हैं। और इसके लिए निर्धारित आयु 18 से 70 वर्ष है। तथा आठवीं उत्तीर्ण जरूरी है। आवेदक को 5 पासपोर्ट फोटो, परिचय पत्र व अन्य कागजात लेकर जाएं।


मुर्गीघर बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें :




यहाँ हम आपको निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा मुर्गीघर बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातों (poultry farm equipment) से अवगत करा रहे है, जो इस प्रकार है...



मुर्गीघर अपने आवास के साथ लगा हुआ एवं स्थानीय सामग्रियों से बनाया जा सकता है। जहाँ तक हो सके, घर को पूर्व-पश्चिम दिशा की ओर बनाएं।

यदि संभव तो मुर्गीघर को इक्कट्ठे हुए पानी, बाढ़ आदि से बचाने हेतु घर के फर्श को जमीन से करीब 1 फुट ऊँचा बनाएं ताकि बीट आदि नीचे इकट्ठा हो जाए जिसे बाद में खाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

मुर्गीघर बहतु महंगा नहीं होना चाहिए, परन्तु घर की मजबूती, आराम तथा सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

घर का फर्श ऐसा होना चाहिए कि नमी तथा दरार पड़ने से बचा रहे, आसानी से साफ किया जा सके, मजबूत हो तथा चूहों इत्यादि का प्रवेश न होने पाए।

मुर्गी घर में आस-पास पेड़ लगाएं ताकि पेड़ों की छाया उस पर पड़ती रहे।

दीवारों का लगभग 75% हिस्से को बांस की जाली बनाकर ढकें। जालीदार दीवार में मोटा बोरा का पर्दा लगाएं जिसे सामान्यतः गोल घुमाकर ऊपर बांध कर रखें। आवश्यकतानुसार बारिश या तेज धुप पड़ने पर उसे खोल कर नीचे लटका दें ताकि मुर्गियाँ पानी तह गर्मी से बची रहें। इन बोरोन को अधिक गर्मी के दिनों में पानी डालकर ठंडा रखें।


जब आप ऊपर बताए गए बिन्दुनुसार अपना मुर्गी फ़ार्म तैयार कर लेते है तो आपको जरूरत पड़ती है फिर आधुनिक उपकरणों की तो इनमे फीडर गर्मी प्रदान करने के लिए लाइट बल्ब तथा हलोजन्स लाइट , दवाई , टीकाकरण की सामग्री इत्यादि शामिल होते है।



ध्यान रहे की मुर्गी पालन व्यवसाय तीन चीज़ों के लिए किया जाता है...




1. मांस के लिए



2. अंडा के लिए



3. अंडा मांस दोनों के लिए

4. कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाना हमारा उद्देश्य है तथा इसके लिए हमें चाहिए के हम सही देसी नस्लों के मुर्गी का चयन करें। अपने जगह के वातावरण के अनुसार ही मुर्गी का नसल का चुनाव करें आजकल बाजार में संकर नस्ल के मुर्गियां भी उपलब्ध हैं जो के अंडा और मांस के लिए काफी लाभदायक हैं।


जून महा कि प्रशिक्षण सुरू होने वाला है आप आवेदन कर सकते है इसमें केवल अस्सी 80 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण ले सकते है l

नीचे दिये गये ऍड्रेस पे आप डॉक्युमेंट्स भेज सकते है..


विश्व मराठा यशोज्ञान फाउंडेशन, 

झेन स्टार फार्मा..

 सिल्वर बिल्डकॉन शॉप नंबर 18, मेहर हॉटेल के नीचे मेहर सिग्नल के पास गोळे कॉलनी नाशिक महाराष्ट्र 


OFFICE CONTACT -7798400021

NAVNATH THAKARE 9881854006


https://chat.whatsapp.com/J7nPCQLra7sCAJdEuppYJB


Click on the link for join group of kukut palan shibir।

कृपया ऊपर दिए गए लिंकको क्लिक करें और ग्रुप में ज्वॉइन करें

सदर लिंक वरती क्लिक करून ग्रुप मध्ये ऍड होऊ शकता...

जरासंध महाभारत कालीन मगध

 जरासंध महाभारत कालीन मगध राज्य के नरेश थे । सम्राट जरासंध ने बहुत से राजाओं को अपने कारागार में बंदी बनाकर रखा था पर उसने किसी को भी मारा नहीं था। इसका कारण यह था कि वह चक्रवर्ती सम्राट बनने की लालसा हेतु ही वह इन राजाओं को बंदी बनाकर रख रहा था ताकि जिस दिन 101 राजा हों और वे महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी बलि दे सके।



बलभद्र और जरासंध के बीच युद्ध

वह मथुरा के नरेश कंस का ससुर एवं परम मित्र था उसकी दोनो पुत्रियो अस्ति और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था। श्रीकृष्ण से कंस के वध का प्रतिशोध लेने के लिए उन्होंने १७ बार मथुरा पर चढ़ाई की लेकिन जिसके कारण भगवान श्रीकृष्ण को मथुरा छोड़ कर जाना पड़ा फिर वो द्वारिका जा बसे, तभी उनका नाम रणछोड़ कहलाया।


जन्म

संपादित करें

माना जाता है कि जरासंध के पिता मगध नरेश बृहद्रथ थे और उनकी दो पटरानियां थी। वह दोनो ही को एक संतान चाहते थे। बहुत समय व्यतीत हो गया और वे बूढ़े़ हो चले थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। तब एक बार उन्होंने सुना की उनके राज्य में ऋषि चंडकौशिक पधारे हुए हैं और वे एक आम के वृक्ष के नीचे विराजमान हैं। यह सुनते ही राजन आशापूर्ण होकर ऋषि से मिलने चल दिए। ऋषि के पास पहुँच कर उन्होंने ऋषि को अपना दुख कह सुनाया। राजा का वृतांत सुनकर ऋषि को दया आ गई और उन्होंने नरेश को एक आम दिया और कहा की इसे अपनी रानी को खिला देना। लेकिन चूंकि उनकी दो पत्नीयां थी और वे दोनो ही से एक समान प्रेम करते थे, इसलिए उन्होंने उस आम के बराबर टुकड़े करके अपनी दोनो रानियों को खिला दिया। इससे दोनो रानियों को आधे-आधे पुत्र हुए। भय के मारे उन्होंने उन दोनो टुकड़ो को वन में फिकवा दिया। तभी वहाँ से जरा नामक राक्षसी गुज़र रही थी। उसने ने माँस के उन दोनों लोथड़ों को देखा और उसने दायां लोथड़ा दाएं हाथ में और बायां लोथड़ा बाएं हाथ में लिया जिससे वह दोनो टुकडे जुड़ गए। और फिर जरा नामक राक्षसी ने उसे राजा बृहद्रथ को सौप दिया और राजभवन में दोनों रानियों की छाती से दुध उतर आया। इसीलिए उसका नाम जरासंध हुआ। सम्राट जरासंध महादेव का बहुत बड़ा भक्त था ।उनकी बहन का नाम शशिरेखा था जो कि धृष्टद्युम्न से प्रेम करती थी परंतु उसके भाई जरासंध ने उसकी शादी कौरव से लगाने का प्रयत्न किया। सभी कौरव शशिरेखा से प्रमुख करते थे पर शशिरेखा ने जिद्द से धृष्टद्युम्न से विवाह की।



अंग प्रदेश का राजा बनने के पश्चात , कर्ण अंग की प्रजा को मगध नरेश के अन्याय से मुक्त करने के लिए जरासंध से युद्ध करता है । यह युद्ध लागातार 500 दिनों तक चला था। इसी युद्व के अन्तिम मे कर्ण जरासंध को बताता है कि उसे उसकी कमजोरी का ज्ञान है। उसे बीच से फाड़कर मारा जा सकता है। तब जरासंध अपनी पराजय स्वीकार कर लेता हैं और यही से उसकी म्रत्यु का रहस्य सबके सामने आ जाता है।


इंद्रप्रस्थ नगरी का निर्माण पूरा होने के पश्चात एक दिन नारद मुनि ने महाराज युधिष्ठिर को उनके पिता का यह संदेश सुनाया की अब वे राजसूय यज्ञ करें। इस विषय पर महाराज ने श्रीकृष्ण से बात की तो उन्होंने भी युधिष्ठिर को राजसूय यज्ञ करने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन महाराज युधिष्ठिर के चक्रवर्ती सम्राट बनने के मार्ग में केवल एक रोड़ा था, मगध नरेश जरासंध, जिसे परास्त किए बिना वह सम्राट नहीं बन सकते थे और ना ही उसे रणभूमि मे परास्त किया जा सकता था। इस समस्या का समाधान करने के लिए श्रीकृष्ण, भीमसेन और अर्जुन के साथ ब्राह्मणों का भेष बनाकर मगध की ओर चल दिए। वहाँ पहुँच कर जरासंध ने उन्हें ब्राह्मण समझकर कुछ माँग लेने के लिए कहा लेकिन उस समय ब्राह्मण भेषधारी श्रीकृष्ण ने कहा की अभी उनके दोनो मित्रों का मौन व्रत है जो अर्ध रात्रि में समाप्त होगा। तब जरासंध ने अर्ध रात्रि तब ही आने का वचन दिया और उन्हें ब्राह्मण कक्ष मे ठहराया।


तब अर्धरात्रि में वह आया लेकिन उसे उन तीनों पर कुछ संदेह हुआ की वे ब्राह्मण नहीं है क्योंकि वे शरीर से क्षत्रिय जैसे लग रहे थे उसने अपने संदेह को प्रकट किया और उन्हे उनके वास्तविक रूप में आने को कहा एवं उन्हे पहचान लिया। तब श्रीकृष्ण की खरी-खोटी सुनने के बाद उसे क्रोध आ गया और उसने कहा की उन्हें जो भी चाहिए वे माँग ले और यहाँ से चले जाएं। तब उन्होंने ब्राह्मण भेष में ही जरासंध को मल्लयुद्ध करने के लिए कहा और फिर अपना वास्तविक परिचय दिया। जरासन्ध एक वीर योधा था इसलिए उसने मल्ल युद्ध के लिए भीम को ही चुना। किंतु अर्जुन भी एक शक्तिशाली और योग्य योद्धा था नकुल भी जरासंध को हरा सकता था। तब अगले दिन उसने भीम के साथ मल्लभूमि में मल्ल युद्ध किया। यह युद्ध लगभग २८ दिनो तक चलता रहा लेकिन जितनी बार भीमसेन उसके दो टुकड़े करते वह फिर से जुड़ जाता। इस पर श्रीकृष्ण ने घास की एक डंडी की सहायता से भीम को संकेत किया की इस बार वह उसके टुकड़े कर के दोनों टुकड़े अलग-अलग दिशा में फेंके। तब भीम ने वैसा ही किया और इस प्रकार जरासंध का वध हुआ।


तब उसका वध करके उन तीनों ने उसके बंदीगृह में बंद सभी ८६ राजाओं को मुक्त किया और श्रीकृष्ण ने जरासंध के पुत्र सहदेव को राजा बनाया। सहदेव ने आगे चलकर के महाभारत के युध मे पान्डवो का साथ दिया।

Monday, May 20, 2024

प्रशिक्षण शिबीर

 प्रशिक्षणाचे विषय 

विश्व मराठा यशोज्ञान फाउंडेशन आयोजित विविध शिक्षण खालील प्रमाणे..

ज्या क्षेत्रातील प्रशिक्षण घेण्याची इच्छा आपणास असेल तर आपण नक्की संपर्क करू 

9881854006



1) कुकुट पालन प्रशिक्षण 

2)मधुमक्षिका पालन प्रशिक्षण 

3)ब्युटी पार्लर प्रशिक्षण 

4)महिला शिवणकाम प्रशिक्षण

5)शेळी पालन प्रशिक्षण

6)गांडूळ खत निर्मिती दुग्ध 7)व्यवसाय प्रशिक्षण 

8)रेशीम कोष उत्पादक प्रशिक्षण

9)प्लंबिंग व सॅनिटरी वर्क प्रशिक्षण

10)सर्वसाधारण उद्योजकता विकास प्रशिक्षण 

11)पापड लोणचे मसाले उद्योग प्रशिक्षण 

12)घरगुती वायरिंग प्रशिक्षण 

13)दुग्ध व्यवसाय व गांडूळ खत निर्मिती प्रशिक्षण 

14)मोबाईल रिपेरिंग व्यवसाय प्रशिक्षण 

15)फोटोग्राफी व व्हिडिओग्राफी प्रशिक्षण 

16)मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण 

17)मेन्स पार्लर व सलून उद्योग प्रशिक्षण 

18)पेपर कव्हर पाकीट फाईल बनवणे प्रशिक्षण 

19)घरेलू उपकरण दुरुस्ती प्रशिक्षण 

20)शेडनेट पॉलिहाऊस मधील शेती प्रशिक्षण 

21)दुचाकी दुरुस्ती प्रशिक्षण 

22)फोटो फ्रेम व लॅमिनेशन प्रशिक्षण 

23)बांबू क्राफ्ट व शोभेच्या वस्तू तयार करणे प्रशिक्षण 

24)सीसीटीव्ही इन्स्टॉलेशन व सर्विसेस प्रशिक्षण 

25)फ्रिज एसी कॉन्फरिंग सर्विसेस प्रशिक्षण 

26)इलेक्ट्रॉनिक मोटर रिवायडींग रिपेरिंग व सर्व प्रशिक्षण