*नेटवर्क मार्केटिंग : यह स्किल का नहीं, सोच का खेल है !!!*
हर साल लाखों लोग इस इंडस्ट्री में आते हैं।
हर किसी को वही प्लान मिलता है, वही प्रोडक्ट्स और एक जैसी ट्रेनिंग...
फिर ऐसा क्या है कि 100 में से सिर्फ़ 2-3 लोग ही टॉप पर पहुँच पाते हैं?
👉 जवाब साफ़ है....
क्योंकि *नेटवर्क मार्केटिंग में सफलता, 80% माइंडसेट पर और सिर्फ़ 20% स्किल्स पर निर्भर करती है !!!*
जब आपका पहला कस्टमर "ना" कहता है,
तो वहाँ *स्किल का नहीं, माइंडसेट का असली इम्तिहान होता है।*
कमज़ोर सोच कहती है: "शायद ये काम मेरे बस का नहीं..."
मजबूत सोच कहती है: *"एक 'ना' के पीछे सौ 'हाँ' छुपे हैं!"*
जब 6 महीने बीत जाते हैं और कोई बड़ा रिज़ल्ट नहीं मिलता,
तो कुछ लोग हार मान लेते हैं और कहते हैं...
"ये बिज़नेस टाइम वेस्ट है!"
पर विजेता सोचते हैं...
*"मैं आज बीज बो रहा हूँ, कल पूरा जंगल उग आएगा!"*
असलियत क्या है?
*स्किल्स कोई भी सीख सकता है.... प्रेजेंटेशन, क्लोजिंग, फॉलोअप सबकुछ।*
*पर माइंडसेट ???*
वो हर किसी के पास नहीं होता।
*यही तय करता है कि कोई भीड़ में गुम हो जाएगा या भीड़ को लीड करेगा।*
100 लोग एक ही सेमिनार में बैठकर एक जैसी ट्रेनिंग सुनते हैं।
*90 लोग बीच में हार मानकर* बाहर चले जाते हैं और कहते हैं....
"चलो कोई और काम ढूंढते हैं..."
वहीं 10 लोग सोचते हैं...
*"मुश्किल है, लेकिन मैं करूंगा!"*
*और कुछ सालों बाद, वही 10 लोग वो जिंदगी जी रहे होते हैं, जिसका सपना बाकी 90 लोग आज भी देख रहे होते हैं।*
⚡ *सबसे बड़ा सबक...*
नेटवर्क मार्केटिंग में लोग *स्किल की कमी से नहीं हारते, वे सोच की कमजोरी से हारते हैं।*
👉 माइंडसेट सही है, तो स्किल्स अपने आप तेज़ हो जाएँगी।
👉 माइंडसेट नहीं है, तो स्किल्स भी बोझ लगेंगी।
*इसलिए सबसे पहले सोच को बदलिए, क्योंकि जब सोच बदल
ती है... तो किस्मत खुद-ब-खुद बदल जाती है !!!*

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